मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा रहा। सुबह वे महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता निर्मल खत्री से उनके आवास पर मुलाकात की और फिर राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
रामलला के दर्शन के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके लिए यह एक आस्था से जुड़ा व्यक्तिगत अनुभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था के अनुसार पूजा करने का अधिकार है, लेकिन धर्म का इस्तेमाल राजनीति या व्यवसाय के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में सभी धर्मों का सम्मान जरूरी है और आस्था को निजी भावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अयोध्या प्रवास के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जब भगवान का आह्वान होता है तो व्यक्ति स्वतः ही उनके दर पर पहुंच जाता है। उन्होंने रामलला के दर्शन के साथ हनुमान जी के दर्शन को भी अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इस दौरान उन्होंने देश में चल रही अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक घटनाओं का असर आम जीवन पर भी दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर, उनके इस दौरे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह का यह दौरा राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकता है। हालांकि दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनका अयोध्या आगमन पूरी तरह से आस्था और व्यक्तिगत भावना से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर, उनका यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से चर्चा का विषय बना रहा।