भारत की बड़ी रक्षा उपलब्धि: 5000 KM दूर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम हुआ स्वदेशी BMD सिस्टम, दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल

You are currently viewing भारत की बड़ी रक्षा उपलब्धि: 5000 KM दूर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम हुआ स्वदेशी BMD सिस्टम, दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल

भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा 10 और 11 जून को किए गए लगातार तीन फ्लाइट ट्रायल्स में इस उन्नत प्रणाली की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। यह सिस्टम लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों का भी मुकाबला करने में सक्षम माना जा रहा है।

यह अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही ट्रैक करके हवा में नष्ट कर सकती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण की सफलता पर वैज्ञानिकों और रक्षा टीम को बधाई देते हुए इससे जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा कीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता मौजूद है। अब तक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों के पास ही इस प्रकार की उन्नत तकनीक उपलब्ध थी।

क्या है ICBM?

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल होती है जो 5,500 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम होती है। यह मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर अंतरिक्ष की दिशा में जाती है और फिर अत्यधिक गति के साथ लक्ष्य की ओर लौटती है। कई ICBM परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती हैं, इसलिए इन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है।

कैसे काम करता है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम?

मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कई सुरक्षा परतों के जरिए काम करता है। सबसे पहले अत्याधुनिक रडार दुश्मन की मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को लॉन्च करने का आदेश देता है। इंटरसेप्टर मिसाइल हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को टक्कर मारकर नष्ट कर देती है।

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल किसी कारणवश लक्ष्य को नष्ट नहीं कर पाती, तो दूसरी रक्षा परत सक्रिय होकर खतरे को खत्म करने का प्रयास करती है। इससे सुरक्षा की सफलता दर काफी बढ़ जाती है।

फेज-II परीक्षण भी रहा सफल

इससे पहले भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम के फेज-II का भी सफल परीक्षण किया था। ओडिशा के धामरा स्थित लॉन्च कॉम्प्लेक्स से एक लक्ष्य मिसाइल छोड़ी गई थी, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में तैयार किया गया था। जमीन और समुद्र आधारित रडार प्रणालियों ने लक्ष्य का पता लगाते ही इंटरसेप्टर सिस्टम को सक्रिय किया और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सफल अवरोधन किया गया।

इस सफलता को भारत की मिसाइल सुरक्षा, सामरिक प्रतिरोधक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) के सफल परीक्षण ने भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं को भी नई मजबूती प्रदान की है।