राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में हुई कथित ड्रग्स फैक्ट्री कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। जांच रिपोर्ट और अदालत के आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ डग थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। चौमहला कोर्ट ने 13 जून को उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एफआईआर में आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर और एएसआई अजय जाट सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
पूरा मामला 21 जनवरी 2026 से शुरू हुआ था, जब आगर पुलिस ने फैजान नामक युवक को 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था। पूछताछ में फैजान ने कथित तौर पर बताया था कि मादक पदार्थ राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लाया गया था। इसके बाद 28 जनवरी को मध्य प्रदेश पुलिस ने 80 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ गांव में दबिश देकर बड़ी मात्रा में ड्रग्स और उससे जुड़ी सामग्री बरामद करने का दावा किया था। कार्रवाई के दौरान शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा को गिरफ्तार भी किया गया था।
हालांकि बाद में जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए। रिपोर्ट में बताया गया कि जब्त किया गया कुछ सामान नया प्रतीत हो रहा था। इसके अलावा मध्य प्रदेश पुलिस ने दावा किया था कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस भी शामिल थी, जबकि स्थानीय पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। इससे कार्रवाई की पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर संदेह बढ़ गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिस द्वारा बताए गए ई-साक्ष्य ऐप की वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। वहीं रिकॉर्ड में दर्ज समय और सीसीटीवी फुटेज के बीच भी अंतर पाया गया। दस्तावेजों के अनुसार जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई सुबह 4:40 बजे से 5:40 बजे के बीच हुई थी, जबकि उपलब्ध साक्ष्यों से पुलिस टीम की मौजूदगी को लेकर अलग तस्वीर सामने आई। इसी आधार पर NDPS अधिनियम के तहत अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।
गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने शुरू से ही कार्रवाई को फर्जी बताते हुए चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर किया था। अदालत के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र मीणा ने मामले की जांच की और कई दस्तावेजों व रिकॉर्ड की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में कई दावों की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आने के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अब डग थाना पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।