जनजातीय भूमि विवाद में बढ़ी कार्रवाई, एसडीएम बदलीं; 30 दिन में मांगी रिपोर्ट

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छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी भूमि के कथित विवादित सौदे को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। मामले में जुन्नारदेव की तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर का तबादला बैतूल कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें पद से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। लगातार हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इस पूरे घटनाक्रम को जमीन विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

विवाद तामिया क्षेत्र के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के आसपास स्थित आदिवासी भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि बाजार में करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन का सौदा बेहद कम कीमत पर किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 6.60 करोड़ रुपये कीमत वाली जमीन का पंजीयन लगभग 6 लाख रुपये में किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जमीन खरीदने वालों में कुछ अधिकारियों के परिजन और उनसे जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोपों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता, उस समय पदस्थ बीएमओ तथा प्रभारी तहसीलदार की पत्नी के नाम पर जमीन का पंजीयन हुआ था। इसी वजह से प्रशासनिक निष्पक्षता और पद के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित आदिवासी परिवार को लंबे समय तक भूमि हस्तांतरण की जानकारी नहीं थी। बाद में दस्तावेजों की जांच शुरू होने पर कई तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर पूरे प्रकरण की पड़ताल की मांग तेज हुई। जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की वैधता को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इसका संज्ञान लिया। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, छिंदवाड़ा कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने पूछा है कि भूमि हस्तांतरण किन परिस्थितियों में हुआ, क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और आदिवासी भूमि संरक्षण से जुड़े नियमों का कितना अनुपालन हुआ।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संवैधानिक अधिकारों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं प्रशासन ने क्षेत्र के कामकाज को प्रभावित होने से बचाने के लिए परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टर राजनंदिनी सिंह को जुन्नारदेव एसडीएम की जिम्मेदारी सौंप दी है। फिलहाल आयोग की जांच, प्रशासनिक फेरबदल और जमीन सौदे से जुड़े आरोप जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं।