जिले के आबकारी विभाग में एक्सपायरी डेट की शराब के वितरण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है. विभागीय दस्तावेजों और नोटिसों से खुलासा हुआ है कि वैधता अवधि समाप्त होने के बावजूद देशी शराब की सैकड़ों पेटियां दुकानों पर भेज दी गईं, जिनमें से अधिकांश शराब उपभोक्ताओं को बेच भी दी गई.
दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण
मामला तब उजागर हुआ जब 15 जून 2026 को आबकारी सर्किल अधिकारी निधि गुप्ता ने संबंधित दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया. जांच में सामने आया कि कुल 260 पेटी एक्सपायरी डेट की देशी शराब दुकानों पर भेजी गई थी, जिनमें से 205 पेटी शराब बिक चुकी थी. शेष 55 पेटी शराब सोम डिस्टिलरी की दुकान क्रमांक-1 के गोदाम में मिली, जिसे बाद में जब्त कर लिया गया. अन्य बची हुई पेटियों को मद्य भंडारण गृह में सील कर दिया गया.
16 जून 2026 को सहायक आयुक्त, जिला आबकारी कार्यालय मुरैना द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि 25 अप्रैल 2025 निर्माण तिथि वाली 60 यूपी देशी मदिरा, जिसकी वैधता एक वर्ष थी, एक्सपायरी होने के बाद भी दुकानों पर भेजी गई.
25 पेटी शराब जारी की गई
नोटिस के अनुसार 9 जून 2026 को मुरैना कम्पोजिट मदिरा दुकान क्रमांक-2 पर 200 पेटी तथा 12 जून 2026 को मुरैना दुकान क्रमांक-1 पर 60 पेटी, इस्लामपुरा पर 25 पेटी और रिठौरा पर 25 पेटी शराब डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से जारी की गई. विभागीय दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि उक्त शराब की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद उसका वितरण किया गया.
सूत्रों के अनुसार यह पूरी खेप जिला आबकारी अधिकारी जितेंद्र गुर्जर के अनुमोदन और हस्ताक्षरों के बाद दुकानों तक पहुंची. मामला उजागर होने के बाद जिला आबकारी अधिकारी द्वारा सहायक जिला आबकारी अधिकारी निधि गुप्ता तथा भंडारण गृह में कार्यरत निजी कंपनी विद्यांचल डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों विजय शर्मा और ऋषिकेश शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.
एक्सपायरी स्टॉक की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई
मामले को और गंभीर बनाते हुए जिला आबकारी अधिकारी द्वारा जारी एक अन्य पत्र में सहायक जिला आबकारी अधिकारी से पूछा गया है कि मध्य भंडारगृह में एक्सपायरी डेट की मदिरा होने के बावजूद उसे चिन्हित कर नष्ट क्यों नहीं कराया गया. पत्र में यह भी उल्लेख है कि 16 मई 2026 को भंडारगृह का प्रभार लेने के बाद भी एक्सपायरी स्टॉक की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराई गई.
वहीं विभाग के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब शराब के वितरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल सिग्नेचर और प्रशासनिक स्वीकृति के बाद हुई, तो केवल निजी कर्मचारियों और अधीनस्थ अधिकारियों पर जिम्मेदारी क्यों तय की जा रही है. इससे विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं.
नियमों के पालन को लेकर भी उठे सवाल
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि नियमों के अनुसार मद्य भंडारण अधिकारी का दायित्व उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी को दिया जाना चाहिए, जबकि मुरैना में जिला आबकारी अधिकारी स्वयं यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं. ऐसे में नियमों के पालन और विभागीय व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शराब की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी, तो उसे दुकानों तक पहुंचाने की अनुमति किसने दी? 205 पेटी शराब उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बाद इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? जिले में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है.