नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट 2026 के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) सेक्टर को लेकर सरकार का दीर्घकालिक विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल वैश्विक कंपनियों के लिए बैक-ऑफिस सेवाएं देने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि वह नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में जीसीसी की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले जहां हर सप्ताह एक नया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित हो रहा था, वहीं अब औसतन हर दिन एक नया जीसीसी शुरू हो रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का भारत पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और वे यहां अपने दीर्घकालिक संचालन का विस्तार कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स सक्रिय हैं। इन केंद्रों ने लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है और भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाएं, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में मुख्य रूप से लागत कम करने के उद्देश्य से निवेश करती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आज कंपनियां भारत को नई तकनीकों के विकास, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल उत्पादों के निर्माण और वैश्विक रणनीति तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान मान रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक इनोवेशन इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने अभी तक भारत में अपने जीसीसी स्थापित नहीं किए हैं। ऐसे में देश के पास निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर मौजूद है। यदि अनुकूल माहौल और मजबूत नीतियां जारी रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत में जीसीसी सेक्टर का विस्तार और तेज़ हो सकता है।
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे केवल महानगरों तक सीमित न रहें, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी निवेश बढ़ाएं। उनके अनुसार छोटे शहरों में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है। यदि वहां आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल सुविधाएं और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो ये शहर भी वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश केंद्र बन सकते हैं।
उन्होंने राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से नई तकनीकों का विकास तेज़ होगा और भारतीय युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और डिजिटल रिसर्च जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कंपनियों से अधिक पेटेंट विकसित करने और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहने के बजाय रिसर्च को बाजार तक पहुंचाना होगा ताकि नई तकनीकों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ सके और भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनें।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य केवल सेवा क्षेत्र में अग्रणी बनना नहीं है, बल्कि ऐसे उत्पाद, प्लेटफॉर्म, एल्गोरिदम और बौद्धिक संपदा तैयार करना है जिनका उपयोग पूरी दुनिया करे। इससे भारत की वैश्विक तकनीकी पहचान और मजबूत होगी तथा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में देश की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों के माध्यम से जीसीसी सेक्टर को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश को बढ़ावा देने और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए सबसे भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य बनाना है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भी ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं जो तकनीकी क्षेत्र, अनुसंधान, डिजिटल अवसंरचना और नवाचार को गति देंगे। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों से भारत आने वाले वर्षों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली केंद्र बन सकता है।
समिट के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत अब केवल वैश्विक कंपनियों के संचालन का सहयोगी नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों, नवाचार और ज्ञान आधारित विकास का प्रमुख साझेदार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि निवेश, कौशल विकास और तकनीकी अनुसंधान की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में जीसीसी सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

