पंजाब के होशियारपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने NRI विवाहों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवती के परिवार का आरोप है कि उसकी शादी ऐसे युवक से कराई गई जिसकी गंभीर बीमारी की जानकारी जानबूझकर उनसे छिपाई गई। परिवार का कहना है कि विवाह के लगभग ढाई महीने बाद युवक की कैंसर के कारण मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें ऐसे दस्तावेज मिले जिनसे पता चला कि उसका पहले भी इलाज और ऑपरेशन हो चुका था। अब पीड़ित परिवार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
पीड़ित परिवार के अनुसार उनकी बेटी ने अमृतसर से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में उच्च शिक्षा के लिए कनाडा का रुख किया था। वहां उसने पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा करने के साथ-साथ टेक्नीशियन के रूप में नौकरी भी शुरू कर दी थी। इसी दौरान एक परिचित के माध्यम से अमेरिका में रहने वाले एक NRI युवक का रिश्ता आया। दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई और सामाजिक व पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए रिश्ता तय कर दिया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें कहीं से भी यह संकेत नहीं मिला कि युवक किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।
परिवार के मुताबिक शादी से पहले दोनों युवक-युवती एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। तस्वीरों और परिवारों की बातचीत के आधार पर रिश्ता आगे बढ़ा। बाद में दोनों भारत पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात हुई और दोनों परिवारों की सहमति से 14 जनवरी 2026 को विवाह संपन्न हुआ। शादी के बाद युवती कनाडा लौट गई और पति भी उसके साथ रहने लगा। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया और परिवार को किसी तरह की शंका नहीं हुई।
परिवार का आरोप है कि शादी के करीब 20 दिन बाद युवती ने देखा कि उसका पति नियमित रूप से कई दवाइयां ले रहा है। जब उसने इसके बारे में पूछा तो युवक ने बताया कि जिम में चोट लगने के कारण डॉक्टर ने ये दवाइयां लिखी हैं। हालांकि युवती ने दवाइयों के नाम ऑनलाइन जांचे तो उसे पता चला कि वे कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं। इस जानकारी के बाद उसने तुरंत अपने माता-पिता को पूरी बात बताई, जिससे परिवार गहरे सदमे में आ गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने तुरंत लड़के के परिजनों से संपर्क कर बीमारी के बारे में जानकारी मांगी और पूछा कि यदि युवक गंभीर बीमारी से पीड़ित था तो विवाह से पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। परिवार का आरोप है कि इस दौरान लड़के के परिजनों ने बीमारी की बात स्वीकार नहीं की और दावा किया कि युवक पूरी तरह स्वस्थ है। इसी कारण दोनों परिवारों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई और मामला लगातार गंभीर होता चला गया।
कुछ ही दिनों बाद युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार के अनुसार उसे दौरा पड़ा और वह बेहोश होकर गिर गया। इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार खराब होती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद युवती और उसका परिवार पूरी तरह टूट गया। उनका कहना है कि यदि बीमारी की सही जानकारी पहले ही दे दी जाती तो वे इस विवाह के बारे में अलग निर्णय ले सकते थे।
परिवार का दावा है कि युवक की मृत्यु के बाद उन्हें कुछ मेडिकल दस्तावेज मिले, जिनसे पता चला कि वर्ष 2021 में उसकी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हुई थी और वर्ष 2025 में दोबारा ऑपरेशन भी किया गया था। परिवार का आरोप है कि इतनी महत्वपूर्ण चिकित्सीय जानकारी विवाह से पहले साझा नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि इन तथ्यों की जानकारी पहले होती तो वे अपनी बेटी का रिश्ता कभी स्वीकार नहीं करते। फिलहाल इन दस्तावेजों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
पीड़ित परिवार का यह भी दावा है कि उन्होंने अपनी क्षमता से बढ़कर शादी का आयोजन किया था। उनके अनुसार विवाह समारोह पर लगभग 73 लाख रुपये खर्च किए गए, जिसमें सोने के आभूषण, वाहन, शगुन और अन्य व्यवस्थाएं शामिल थीं। परिवार का कहना है कि उनके पास शादी से जुड़े वीडियो, लेन-देन के प्रमाण और मेडिकल दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही है। उनका आरोप है कि यदि बीमारी की जानकारी पहले मिल जाती तो इतनी बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति से बचा जा सकता था।
मामले को लेकर परिवार ने पंजाब राज्य महिला आयोग का भी दरवाजा खटखटाया। परिवार के अनुसार आयोग ने लड़के के परिजनों को समन जारी कर पेश होने के निर्देश दिए थे, लेकिन वे निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हुए। परिवार का कहना है कि आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही थी। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अब तक जांच में अपेक्षित गति दिखाई नहीं दी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्रवाई लंबित है।
अब पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूरे मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि विवाह से पहले बीमारी की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए, महिला आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहराई से जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

