NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का संसद में काला विरोध, राहुल-प्रियंका समेत विपक्ष ने सरकार से तत्काल चर्चा और जवाब की मांग की

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NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और इस पूरे मामले को देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। विपक्ष ने सरकार से मांग की कि संसद के दोनों सदनों में इस विषय पर तत्काल चर्चा कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी दी जाए। कांग्रेस का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर जवाबदेही निभानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक का मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद गंभीर कमियों को सामने लाता है। पार्टी का कहना है कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत और तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उनका भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ सकता है। इसी कारण विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया और सरकार पर छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेने का दबाव बनाया।

विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया और इसे छात्रों के साथ न्याय की मांग का प्रतीक बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि उन लाखों अभ्यर्थियों की आवाज संसद तक पहुंचाना है जो परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चिंतित हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

सरकार की ओर से यह कहा गया कि वह NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से अधिक महत्वपूर्ण है और सरकार को इस पूरे मामले में पारदर्शिता दिखानी चाहिए। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए हर स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है और छात्रों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पूरे विवाद के बाद उनके पास शिक्षा मंत्री बने रहने का नैतिक आधार कमजोर हो गया है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक इस मामले में जवाब चाहते हैं तथा सरकार को केवल बयान देने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

संसद के भीतर विपक्षी दलों ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग को लेकर अपनी रणनीति बनाई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संसद की आगे की कार्यवाही और NEET पेपर लीक मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने पर विचार-विमर्श किया गया। विपक्ष का कहना है कि जब तक छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संतोषजनक चर्चा नहीं होती, तब तक वे लगातार सरकार से जवाब मांगते रहेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और विपक्ष इस मामले का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि सरकार पहले ही जांच एजेंसियों को सक्रिय कर चुकी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पार्टी ने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।

इससे पहले भी कांग्रेस ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था और प्रधानमंत्री आवास के निकट धरना देकर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई थी। पार्टी का कहना है कि उसका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो जाती। कांग्रेस ने यह भी दोहराया कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

मानसून सत्र के दौरान NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद की सबसे प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है। विपक्ष इस मामले पर विस्तृत बहस, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच का भरोसा दे रही है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि देश के लाखों छात्रों, अभिभावकों और पूरी शिक्षा प्रणाली के विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।