दिल्ली पुलिस ने राजधानी में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शाहदरा जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने की, जिसने लंबे समय से मिल रही सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू की थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी 10वीं और 12वीं की नकली मार्कशीट और प्रमाणपत्र तैयार कर लोगों को बेचते थे। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए जा रहे कई उपकरण और दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच आगे की जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली थी कि शाहदरा क्षेत्र का रहने वाला एक व्यक्ति फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार करने और उन्हें पैसों के बदले उपलब्ध कराने का काम कर रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी पुष्टि करने के लिए विशेष योजना बनाई। अधिकारियों ने पहले आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी और उसके बाद पर्याप्त सबूत जुटाने की दिशा में कार्रवाई शुरू की, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
सूचना की पुष्टि करने के लिए पुलिस ने एक जवान को ग्राहक बनाकर आरोपी से संपर्क कराया। योजना के तहत आरोपी को व्हाट्सऐप के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज भेजे गए और 12वीं की फर्जी मार्कशीट तैयार कराने की मांग की गई। इस प्रक्रिया के जरिए पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी वास्तव में नकली दस्तावेज तैयार करने के कारोबार में शामिल है। जब आरोपी ने दस्तावेज तैयार करने की सहमति दे दी, तब पुलिस ने आगे की कार्रवाई की योजना बनाई।
इसके बाद पुलिस टीम ने शाहदरा स्थित जीटी रोड पर विकास मॉल के पास जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उसके कब्जे से 10वीं और 12वीं की दो फर्जी मार्कशीट बरामद हुईं। पुलिस ने मौके से अन्य महत्वपूर्ण सामग्री भी जब्त की, जिनका इस्तेमाल नकली दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था। बरामद सामान को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है ताकि मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाया जा सके।
मुख्य आरोपी से पूछताछ के दौरान पुलिस को इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दो अन्य लोगों की जानकारी मिली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने सबाब आलम और फरीद अहमद सैफी को भी गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपी मिलकर लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को अंजाम दे रहे थे। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और इनके माध्यम से कितने लोगों तक फर्जी दस्तावेज पहुंचे।
छापेमारी और तलाशी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, प्रिंटर, फर्जी मार्कशीट, डिजिटल फाइलें और दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन्हीं संसाधनों का उपयोग कर नकली प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। पुलिस अब जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी करवा रही है, जिससे इस गिरोह के काम करने के तरीके और अन्य संभावित ग्राहकों के बारे में जानकारी मिल सके।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अब तक करीब 100 से 150 फर्जी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तथा प्रमाणपत्र तैयार कर बेच चुके हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रत्येक दस्तावेज के बदले लगभग 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की रकम वसूलते थे। इस अवैध कारोबार के जरिए उन्होंने काफी समय तक आर्थिक लाभ कमाया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन स्थानों पर किया गया और इससे कितने लोग प्रभावित हुए।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक ऐसे शिक्षा संस्थान के समाप्त हो चुके रजिस्ट्रेशन का दुरुपयोग कर रहे थे, जिसका नाम ‘ग्रामीण मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान’ बताया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इसी नाम का इस्तेमाल करते हुए पिछली तारीखों में जारी किए गए प्रमाणपत्र और मार्कशीट तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहे थे। इस तरीके से तैयार किए गए दस्तावेज देखने में असली जैसे प्रतीत होते थे, जिससे आम लोगों के साथ-साथ कई संस्थानों के गुमराह होने की आशंका भी जताई जा रही है।
दिल्ली पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित था या फिर अन्य राज्यों में भी इसके संपर्क मौजूद थे। इसके अलावा पुलिस उन लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है जिन्होंने इन आरोपियों से फर्जी प्रमाणपत्र खरीदे या उनका इस्तेमाल किसी सरकारी अथवा निजी संस्था में किया। जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि शिक्षा से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा एक गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां बरामद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सके और भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके।

