CJP आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके टाइफाइड से बीमार, जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ी; सरकार आज दे सकती है बड़ा फैसला

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उन्हें टाइफाइड हो गया है। लगातार आंदोलन और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों और पेपर लीक मामले में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। दीपके की तबीयत खराब होने की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों ने जल्द स्वस्थ होने की कामना की, वहीं संगठन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन की रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पहले की तरह जारी है और बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं।

दिल्ली में बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी है। शुक्रवार देर रात कई स्थानों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग लगाई गई और कुछ बैरिकेड्स को वेल्डिंग के जरिए स्थायी रूप से जोड़ा गया ताकि किसी भी स्थिति में भीड़ नियंत्रित की जा सके। पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के साथ हुई पिछली बैठक के बाद कहा था कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है और जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। CJP नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे की रणनीति पहले से अधिक आक्रामक हो सकती है।

शनिवार दोपहर सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बातचीत होने की संभावना जताई गई है। इस बैठक को आंदोलन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित अन्य प्रमुख मांगों पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है। आंदोलनकारी भी इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं और उनका कहना है कि लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही आगे की दिशा तय की जाएगी। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार से केवल बातचीत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस और लिखित निर्णय सामने आना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार के साथ आगे की बातचीत का कोई विशेष अर्थ नहीं रहेगा। उनके अनुसार आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल आश्वासन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय कराना और छात्रों को न्याय दिलाना है। संगठन का कहना है कि सभी फैसले आंदोलनकारियों के हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।

पिछली बैठक के बाद CJP ने दावा किया था कि सरकार ने आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति जताई है। हालांकि संगठन का कहना है कि जब तक इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक और लिखित आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक किसी भी दावे को अंतिम नहीं माना जाएगा। इसी कारण आंदोलनकारी सरकार की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखा। प्रदर्शन स्थल पर मेडिकल सहायता शिविर, हेल्प डेस्क और स्वयंसेवकों की टीमें लगातार सक्रिय हैं ताकि वहां मौजूद लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। कई डॉक्टर और स्वयंसेवक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए अलग-अलग समूह लगातार काम कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा संबंधी कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं। कुछ संवेदनशील इलाकों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है और कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और अफवाहों पर विश्वास न करें।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पेपर लीक मामले की जांच भी तेज कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विशेष जांच दल (STF) का गठन किया है, जबकि विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने भी इस मामले से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। दूसरी ओर आंदोलनकारी चाहते हैं कि जांच के साथ-साथ जवाबदेही भी तय हो और छात्रों का विश्वास दोबारा बहाल किया जाए।

अब सभी की निगाहें सरकार और CJP के बीच होने वाली प्रस्तावित बैठक पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय देती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध खत्म होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि कोई ठोस फैसला नहीं आता है तो संगठन ने आंदोलन को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में शनिवार का दिन इस पूरे आंदोलन और पेपर लीक विवाद के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बैठक के बाद आगे की रणनीति और सरकार की दिशा दोनों स्पष्ट हो सकती हैं।