बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर गुरुवार सुबह 7 बजे से उपचुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर सीट पर मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार वोटिंग शाम 6 बजे तक जारी रहेगी, जबकि तीनों सीटों के नतीजे 3 अगस्त 2026 को घोषित किए जाएंगे। इन उपचुनावों को संबंधित राज्यों की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि तीनों सीटों पर प्रमुख दलों के बीच सीधी और प्रतिष्ठित लड़ाई देखने को मिल रही है।
सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर हो रही है। यहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता मैदान में हैं। बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। नितिन नबीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं, इसलिए इस चुनाव को भाजपा की पकड़ और प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता दोनों की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
मतदान के दौरान बांकीपुर के किदवईपुरी इलाके में भाजपा और जन सुराज समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई। जन सुराज ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने से रोका गया, जबकि भाजपा ने दावा किया कि फर्जी मतदान की कोशिश की जा रही थी। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। हालांकि मतदान प्रक्रिया को जारी रखा गया और अधिकारियों ने कहा कि अधिकांश केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है।
बांकीपुर सीट पर कुल 422 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 3.79 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस सीट पर कई वीवीआईपी मतदाता भी शामिल हैं, जिनमें लालू प्रसाद यादव का परिवार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, सांसद रविशंकर प्रसाद, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और भाजपा नेता नितिन नबीन प्रमुख हैं। यही कारण है कि इस सीट का चुनाव केवल स्थानीय नहीं बल्कि राज्यस्तरीय राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है। सभी प्रमुख दलों ने यहां व्यापक प्रचार अभियान चलाया था।
प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान बांकीपुर की गलियों, मोहल्लों और आवासीय इलाकों में लगातार जनसंपर्क किया। उन्होंने इस उपचुनाव को बिहार की वर्तमान सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह बताया। दूसरी ओर भाजपा ने विकास, संगठन और क्षेत्रीय संपर्क को अपना मुख्य मुद्दा बनाया। नितिन नबीन ने भी मतदाताओं से अपील की कि नई जिम्मेदारियों के बावजूद बांकीपुर उनके लिए प्राथमिकता बना रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां का मतदान प्रतिशत और शहरी मतदाताओं की भागीदारी परिणाम पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने अनुभवी नेता कुंवर घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है, जो सातवीं बार चुनावी मुकाबले में हैं। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद खाली हुई थी। बैंक घोटाले से जुड़े मामले में सजा होने के बाद उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के तहत अयोग्य ठहराया गया था।
दतिया में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और यहां 2.20 लाख से अधिक मतदाता मतदान करेंगे। सुबह से ही कई केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 16 कंपनियों के 1,422 जवान तैनात किए गए हैं। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन किए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदान के बाद अपनी जीत का दावा किया। प्रशासन ने संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की है।
दतिया उपचुनाव में दोनों प्रमुख दलों को आंतरिक असंतोष का भी सामना करना पड़ा। भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया, जिसके बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में नरोत्तम मिश्रा को स्वयं सामने आकर समर्थकों से पार्टी उम्मीदवार का समर्थन करने की अपील करनी पड़ी। कांग्रेस में भी टिकट को लेकर कई नेताओं के बीच खींचतान की चर्चा रही। इसलिए इस सीट पर केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला ही नहीं, बल्कि दोनों दलों की संगठनात्मक एकजुटता भी दांव पर लगी हुई है।
गुजरात की वडोदरा स्थित मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। यह सीट भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी। योगेश पटेल 1990 से लगातार राजनीति में सक्रिय रहे और आठ बार विधायक चुने गए थे। भाजपा ने इस बार सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी पर दांव लगाया है। मंजलपुर को भाजपा की पारंपरिक और मजबूत सीट माना जाता है, इसलिए कांग्रेस यहां भाजपा को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।
तीनों राज्यों के ये उपचुनाव अलग-अलग राजनीतिक संदेश देने वाले माने जा रहे हैं। बिहार में प्रशांत किशोर की चुनावी ताकत और भाजपा की शहरी पकड़ की परीक्षा है, मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों के संगठनात्मक समीकरण दांव पर हैं, जबकि गुजरात में भाजपा अपनी पारंपरिक बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रही है। मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी की नजर 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर रहेगी, जो इन तीनों राज्यों की आगामी राजनीतिक रणनीतियों और नेतृत्व की दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

