पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पूर्वी बर्धमान जिले से जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गुरुवार देर रात एक आवासीय परिसर में की गई, जहां से 23 वर्षीय हामिम मंडल को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती जांच में उसके मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कुछ दस्तावेजों से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जिसके आधार पर मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। गिरफ्तारी के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
जांच अधिकारियों के मुताबिक संदिग्ध के पास से मिले डिजिटल रिकॉर्ड से यह संकेत मिला है कि वह कुछ राजनीतिक व्यक्तियों और संगठनों से संबंधित सूचनाएं जुटाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस फिलहाल इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि ये गतिविधियां व्यक्तिगत स्तर पर की जा रही थीं या किसी बड़े नेटवर्क के निर्देश पर। अधिकारियों ने कहा कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की तकनीकी तथा कानूनी जांच की जा रही है, इसलिए किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
STF का दावा है कि हामिम मंडल पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुछ संदिग्ध संपर्कों के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियों को शक है कि वह ऐसे मॉड्यूल से जुड़ा हो सकता है जो सीमा पार से संचालित नेटवर्क के संपर्क में था। अधिकारियों का कहना है कि उसके मोबाइल से कई चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद की गई है, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे और बातचीत का स्वरूप क्या था।
पुलिस ने यह भी कहा है कि प्रारंभिक पूछताछ में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनके आधार पर उसके संबंध पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड बताए जाने वाले सज्जाद भट से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। हालांकि एजेंसियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह संबंध प्रत्यक्ष था या केवल संपर्कों की श्रृंखला के माध्यम से सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में हर कड़ी की स्वतंत्र पुष्टि की जाती है और बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि हामिम मंडल पहले हावड़ा क्षेत्र में काम करता था और बाद में पूर्वी बर्धमान में आकर रहने लगा। उसने कथित तौर पर एक अपार्टमेंट किराए पर लिया था और पिछले कुछ महीनों से अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने अपना ठिकाना क्यों बदला, उसके खर्चों का स्रोत क्या था और क्या उसके रहने की व्यवस्था किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की मदद से की गई थी।


STF अधिकारियों के अनुसार मोबाइल टावर लोकेशन, इंटरनेट उपयोग का पैटर्न और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह कुछ हैंडलर्स के लगातार संपर्क में था और बातचीत में ऐसे संकेत मिले हैं जिनकी विस्तार से पड़ताल की जा रही है। फोरेंसिक विशेषज्ञ अब डेटा रिकवरी, डिलीट की गई फाइलों और एन्क्रिप्टेड संचार की जांच कर रहे हैं ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके संभावित उद्देश्य को समझा जा सके।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या संदिग्ध किसी ऐसे समूह का हिस्सा था जिसे पश्चिम बंगाल में कुछ विशेष व्यक्तियों या संगठनों की जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा गया था। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में कई डिजिटल दस्तावेज, संपर्क सूची और लोकेशन से जुड़ी सूचनाएं खंगाली जा रही हैं। अभी तक किसी बड़े षड्यंत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच को बहुस्तरीय तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
संदिग्ध को बर्धमान की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और रैपिड एक्शन फोर्स सहित अतिरिक्त बल तैनात किया गया था। पुलिस का कहना है कि हिरासत के दौरान उससे पूछताछ कर उसके संपर्कों, यात्रा विवरण, वित्तीय लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय किया जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे व्यापक नेटवर्क होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय जांच और संपर्कों की पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी या संगठित आपराधिक नेटवर्क की पहचान करना और उसकी गतिविधियों को समय रहते रोकना है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और एजेंसियां बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और पूछताछ से मिली जानकारी को आपस में मिलाकर आगे की कार्रवाई तय कर रही हैं। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और इसे संवेदनशील सुरक्षा जांच के रूप में लिया जा रहा है।

