संसद में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर हंगामा, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

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संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी सदस्यों ने इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित करनी पड़ी।

राज्यसभा में भी यही स्थिति देखने को मिली। विपक्षी सांसदों ने मामले पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी और बाद में उसे आगे के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सरकार को संसद में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

विपक्ष का कहना है कि संबंधित ट्रस्ट के गठन और उससे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में केंद्र सरकार की भूमिका रही है। इसलिए इस मामले में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह स्थिति स्पष्ट करे और सभी सवालों का जवाब दे।

सरकार की ओर से इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा गया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहा है। सरकार ने आरोप लगाया कि कुछ दल धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषयों पर राजनीति कर रहे हैं।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि जिन दलों ने पहले राम मंदिर से जुड़े मुद्दों का विरोध किया था, वे अब इस विषय पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।

संसद परिसर के बाहर भी विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया। सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और मामले की जांच की मांग दोहराई।

इस बीच, सत्तापक्ष के नेताओं ने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने विपक्ष से सदन चलाने में सहयोग की अपील की।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक टकराव संसद के मानसून सत्र का प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।