अभिजीत दीपके बोले- CJP को अभी राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे, सितंबर से देशभर में चलेगा ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि फिलहाल संगठन को राजनीतिक पार्टी में बदलने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि अभी सीधे चुनावी राजनीति में उतरना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक लोकतंत्र केवल राजनीतिक पार्टियों और चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनता, सामाजिक संगठन, मीडिया और न्यायपालिका की भी अहम भूमिका है।

दीपके ने कहा कि CJP की कोर कमेटी में संगठन को राजनीतिक पार्टी बनाने को लेकर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का फैसला नहीं लिया गया है। उनका मानना है कि देश में पहले से मौजूद कई बड़ी राजनीतिक पार्टियां अपने अस्तित्व और संगठन को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में CJP का मुख्य फोकस फिलहाल जन मुद्दों और लोगों की भागीदारी पर रहेगा।

उन्होंने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े लोग आंदोलन के दौरान उनसे मिलने और समर्थन जताने पहुंचे थे। हालांकि, उनके मुताबिक किसी राजनीतिक दल की ओर से CJP में शामिल होने या उसे अपने साथ जोड़ने का औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। दीपके ने यह भी कहा कि आंदोलन को राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रखना जरूरी है, ताकि उसके मुद्दों पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव न रहे।

CJP की कोर कमेटी को लेकर उठ रहे सवालों पर दीपके ने कहा कि इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। इनमें कानूनी पत्रकारिता, पेपर लीक, नीति और बजट तथा किसान आंदोलन जैसे मुद्दों से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कोर टीम का गठन केवल व्यक्तिगत रिश्तों के आधार पर नहीं किया गया है और संगठन का विस्तार होने पर आगे और लोगों को जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

अपने खिलाफ उठ रहे विरोध और अहंकार के आरोपों पर दीपके ने कहा कि उन्होंने विरोध करने वाले लोगों से बातचीत की है। उनके मुताबिक टीम के सदस्यों ने भी ऐसे लोगों के साथ कई घंटे चर्चा की। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को कोर टीम में शामिल करना संभव नहीं है और किसी को दबाव या मजबूरी में संगठन की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।

चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर दीपके ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार 2024 के आम चुनाव के बाद वोटर लिस्ट से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। उनका दावा है कि लोकतंत्र के लिए सिर्फ EVM पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी भी चिंता का विषय है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि पहले वोटर सरकार चुनता था, लेकिन अब स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि सरकार तय करती है कि वोटर कौन होगा।

दीपके ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता किसी पार्टी और विचारधारा को ध्यान में रखकर अपने प्रतिनिधि को चुनता है, लेकिन चुनाव के बाद कई बार निर्वाचित प्रतिनिधि दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में सरकार बनाने का समीकरण बदल जाता है और इसका असर जनता के भरोसे पर पड़ता है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी को चुनाव के अलावा भी मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ कार्यक्रम शुरू करने की जानकारी दी। इस अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं तथा अपेक्षाओं को समझने की योजना है। दीपके के मुताबिक इन बातचीत से सामने आने वाले मुद्दों को एक साथ रखकर आगे के लिए मॉडल एजेंडा तैयार किया जाएगा। उनका कहना है कि संगठन का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं को समझना भी है।

धार्मिक मुद्दों पर होने वाली राजनीतिक बहस को लेकर दीपके ने कहा कि देश के राजनीतिक विमर्श का फोकस बदलने की जरूरत है। उनके मुताबिक चुनाव के दौरान धर्म से जुड़े मुद्दों की बजाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे सवालों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रोजगार पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं, इसलिए भविष्य की नीतियों पर गंभीर चर्चा जरूरी है।

भारत में रहने को लेकर दीपके ने स्पष्ट किया कि वह देश में ही रहेंगे और अपना पूरा समय CJP के काम को देंगे। उन्होंने युवाओं की भूमिका को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक सबसे बड़ी बात यह रही कि युवाओं ने अपने अंदर का डर कम किया और सरकार से सवाल पूछते हुए जवाबदेही की मांग की। उन्होंने समर्थकों से किसी एक व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा बड़ा बनाने से बचने की अपील भी की।

दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को देश, संविधान और संस्थाओं से बड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि लोगों के समर्थन के बिना कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकारें अपने वादों और समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ती हैं, तो युवाओं और छात्रों को फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

उन्होंने 16 साल की उम्र में मतदान के अधिकार को लेकर कहा कि फिलहाल यह CJP के एजेंडे में शामिल नहीं है और इस मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं विदेश नीति को लेकर उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों तथा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर बने दबाव का भी जिक्र किया।

कुल मिलाकर, अभिजीत दीपके ने फिलहाल CJP को चुनावी राजनीति में उतारने के बजाय जन आंदोलनों, लोगों की समस्याओं और सार्वजनिक भागीदारी पर ध्यान देने के संकेत दिए हैं। सितंबर से प्रस्तावित ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के जरिए संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से सीधे संवाद करने की तैयारी में है। इससे सामने आने वाले मुद्दों के आधार पर आगे की रणनीति और एजेंडा तय करने की बात कही गई है।