CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई फटकार, बोले- छात्रों के विरोध में दखल देने वाला कौन? NALSAR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

You are currently viewing CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई फटकार, बोले- छात्रों के विरोध में दखल देने वाला कौन? NALSAR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के एनरोलमेंट विवाद को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यूनिवर्सिटी के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की ओर से जारी किए गए सर्कुलर पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध के मामले में BCI का इस तरह हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। CJI ने यह भी कहा कि अगर छात्र कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखते हैं, तो उन्हें अपनी आवाज उठाने की अनुमति होनी चाहिए।

CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह खुद भी छात्र जीवन में विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रों के विरोध को उनके और छात्रों के बीच की बातचीत का विषय बताया और सवाल उठाया कि BCI इसमें दखल देने वाला कौन होता है।

पूरा विवाद NALSAR यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों के विरोध से शुरू हुआ था। छात्रों ने CJI सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर उनसे जुड़े निमंत्रण को वापस लेने की मांग की थी।

छात्रों के विरोध की वजह CJI सूर्यकांत की कुछ हालिया टिप्पणियां बताई गई थीं। छात्रों का कहना था कि प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर उन्होंने अपनी असहमति जताई थी। इसी वजह से छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर सवाल उठाए थे।

इसके बाद 13 अगस्त को BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट अगले आदेश तक नहीं किया जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी और विरोध अभियान में शामिल लोगों की जानकारी देने को कहा गया था।

BCI के इस शुरुआती फैसले के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। हालांकि कुछ ही घंटों के भीतर BCI ने अपना फैसला बदल दिया और स्पष्ट किया कि 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं। परिषद ने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति की गलती या गतिविधि का नुकसान पूरे बैच के छात्रों को नहीं उठाना चाहिए।

फैसला बदलने के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। BCI ने हालांकि यह भी कहा कि वह यूनिवर्सिटी से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार करेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है।

बाद में 2026 बैच के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही भी बंद कर दी गई। BCI की ओर से कहा गया कि छात्रों की ओर से किसी गड़बड़ी या आंदोलन में भूमिका पाए जाने की जानकारी नहीं मिली। इस बीच BCI के शुरुआती आदेश पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि छात्रों को अपनी बात रखने के अधिकार के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की कार्रवाई उचित नहीं हो सकती।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में CJI सूर्यकांत की टिप्पणी से मामले में नया मोड़ आया है। कोर्ट ने छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए BCI से जवाब मांगा है। मामले की आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि छात्रों के विरोध, बार काउंसिल की कार्रवाई और यूनिवर्सिटी से जुड़ी शिकायतों पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।