DGCA भारतीय एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू की रैंडम ड्रग टेस्टिंग को और सख्त करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर साल बड़ी संख्या में पायलट और अन्य क्रू सदस्यों की यूरिन सैंपल के जरिए जांच की जा सकती है।
मौजूदा नियमों के तहत हर साल कम से कम 10% फ्लाइट क्रू की रैंडम यूरिन जांच की जाती है। अब इस दायरे को बढ़ाकर करीब 25% या उससे अधिक करने पर विचार किया जा रहा है।
इस प्रस्ताव का मकसद उड़ान के दौरान पायलट और क्रू की फिटनेस तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। खास तौर पर प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर निगरानी बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
पायलटों की ड्रग टेस्टिंग का मुद्दा हाल ही में सामने आई एक विमान घटना के बाद ज्यादा चर्चा में आया है। इस घटना के बाद फ्लाइट क्रू की जांच और सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठे थे।
घटना के बाद संबंधित पायलट की ड्रग टेस्टिंग किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच में प्रतिबंधित पदार्थ के इस्तेमाल से जुड़े परिणाम सामने आने की बात कही गई, हालांकि पूरे मामले की जांच और संबंधित प्रक्रियाएं अलग-अलग स्तर पर जारी हैं।
इसी के साथ विमान में तकनीकी समस्या से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी। विमान की तकनीकी स्थिति और घटना के कारणों की जांच संबंधित विमानन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
इसके बाद एयरलाइन स्तर पर भी अपने पायलटों और फ्लाइट क्रू की जांच बढ़ाई गई है। इन जांचों में प्रतिबंधित पदार्थों और नियमों के तहत प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
प्रस्तावित नए नियम लागू होने पर हर साल पहले की तुलना में कहीं अधिक पायलटों और क्रू सदस्यों के सैंपल लिए जाएंगे। रैंडम टेस्टिंग होने के कारण किसी भी कर्मचारी को पहले से यह जानकारी नहीं होगी कि उसकी जांच कब की जाएगी।
उड़ान सुरक्षा के नियमों के तहत पायलट और क्रू सदस्यों के लिए शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर पहले से ही सख्त प्रावधान हैं। उड़ान से पहले निर्धारित अवधि के दौरान ऐसे पदार्थों के सेवन पर रोक है और ड्यूटी के दौरान भी इनका इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
DGCA की ओर से नियमों को और प्रभावी बनाने की दिशा में यह प्रस्ताव सामने आया है। अगर नया प्रतिशत लागू होता है, तो भारतीय एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू की रैंडम ड्रग टेस्टिंग पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी और उड़ान सुरक्षा की निगरानी और मजबूत हो सकती है।

