जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
विटामिन B12 उन आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है, जिसकी कमी हमारे शरीर को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यह विटामिन दिमाग और नर्वस सिस्टम के सामान्य कार्य के लिए जरूरी है। साथ ही, यह लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के निर्माण और DNA सिंथेसिस में भी अहम भूमिका निभाता है। यही नहीं, विटामिन B12 शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में मदद करता है। इसकी कमी लंबे समय तक अनदेखी की जाए तो एनीमिया, नर्व डैमेज और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
विटामिन B12 की कमी के प्रमुख लक्षण
1. लगातार थकान और कमजोरी
शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण कम होने पर टिशू और मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसकी वजह से व्यक्ति हमेशा थका हुआ और कमजोर महसूस करता है। यह विटामिन B12 की कमी का सबसे शुरुआती संकेत माना जाता है।
2. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना
जब शरीर में RBCs सही तरह से नहीं बनते और उनका टूटना शुरू हो जाता है, तो रक्त में बिलीरुबिन नामक पदार्थ जमा होने लगता है। इससे त्वचा और आंखों का रंग पीला दिखाई देने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में जॉन्डिस लक्षण भी कहा जाता है।
3. हाथ-पैर सुन्न होना और झुनझुनी
विटामिन B12 नर्वस सिस्टम की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से नसें सही तरह से सिग्नल ट्रांसफर नहीं कर पातीं। नतीजा यह होता है कि हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या “सुई चुभने” जैसी समस्या महसूस होने लगती है। कई बार यह बैलेंस बिगड़ने और चलते-चलते गिरने तक की स्थिति पैदा कर देती है।
4. याददाश्त कमजोर होना और मूड डिसऑर्डर
दिमागी कार्यों के लिए B12 अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से याददाश्त प्रभावित होती है, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आती है और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। लंबे समय तक इसकी कमी बुजुर्गों में डिमेंशिया और डिप्रेशन के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
विटामिन B12 की कमी से होने वाले खतरे
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एनीमिया – लाल रक्त कोशिकाएं न बनने से शरीर में खून की कमी हो सकती है।
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नर्व डैमेज – लगातार झुनझुनी और सुन्नपन से स्थायी नर्व डैमेज का खतरा रहता है।
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मानसिक स्वास्थ्य पर असर – याददाश्त की समस्या, कन्फ्यूजन और मूड डिसऑर्डर बढ़ सकते हैं।
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हृदय संबंधी जोखिम – लंबे समय तक कमी रहने से हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
विटामिन B12 की कमी को कैसे पूरा करें?
शरीर में विटामिन B12 का स्तर बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। इसके लिए आप अपनी डाइट में इन खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं:
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नॉन-वेज सोर्सेज – मांस, मछली और अंडे विटामिन B12 के सबसे अच्छे स्रोत हैं।
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डेयरी प्रोडक्ट्स – दूध, पनीर और दही भी इसके अच्छे विकल्प हैं।
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फोर्टिफाइड फूड्स – कुछ सीरियल्स और सोया उत्पादों में B12 को फोर्टिफाइड किया जाता है, जो खासतौर पर शाकाहारी लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं।
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सप्लीमेंट्स – अगर आहार से कमी पूरी नहीं हो पा रही हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं।
विटामिन B12 की कमी कोई साधारण समस्या नहीं है। यह शरीर की ऊर्जा, खून, नर्वस सिस्टम और दिमाग—सब पर असर डालती है। अगर आपको बार-बार थकान, पीली त्वचा, हाथ-पैरों में झुनझुनी या याददाश्त कमजोर होने की समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच जरूर कराएं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम या डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।