जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों युवा कांग्रेस ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार प्रदेश में युवा कांग्रेस की सदस्य संख्या ने 15 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है — और यह सब कुछ हुआ मात्र 30 दिनों के भीतर! बीते 20 जून से शुरू हुए सदस्यता अभियान में युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 19 जुलाई को जैसे ही ऑनलाइन मेंबरशिप बंद हुई, पूरे प्रदेश में राजनीतिक पारा चढ़ गया।
बता दें, युवा कांग्रेस के इस चुनाव में सिर्फ सदस्यता नहीं हुई, बल्कि युवाओं ने ब्लॉक अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी मतदान किया है। मतदान पूरी तरह ऑनलाइन हुआ है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है — पूरे दो महीने तक इन वोटों की स्क्रूटनी चलेगी। प्रत्याशी की वैधता जांचने के लिए देखा जाएगा कि वोटर ने सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए हैं या नहीं, वीडियो सबमिट किया है या नहीं, और सदस्यता शुल्क जमा किया है या नहीं। कहीं भी चूक होने पर वोट रद्द कर दिया जाएगा।
धार में सियासी ‘महाभारत’, छिंदवाड़ा में ‘शांति’
प्रदेशभर के जिलों में जहां युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए घमासान छिड़ा, वहीं सबसे चौंकाने वाली तस्वीर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के गृह जिले धार से आई — यहां अध्यक्ष पद के लिए 15 उम्मीदवारों ने ताल ठोकी, जो कि प्रदेश में सबसे ज्यादा है। इसके ठीक उलट, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में कोई मुकाबला नजर नहीं आया। दोनों जिलों में सिर्फ एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतरे, यानी निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने तय हैं। हरदा में भी स्थिति समान रही।
बता दें, मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के भीतर इस बार चुनावी रणभूमि काफी दिलचस्प और बहुस्तरीय बन गई है। एक ओर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर में हुई ज़बरदस्त वोटिंग ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है, जिसमें सबसे आगे पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया हैं। वहीं, भोपाल से अभिषेक परमार और ग्वालियर से शिवराज यादव भी अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत के साथ मुकाबले में डटे हैं। यह लड़ाई केवल व्यक्तिगत चेहरों की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर की राजनीतिक विरासत, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन की परतों को भी सामने ला रही है।
इसी के समानांतर महासचिव पद की जंग सबसे ‘हॉट सीट’ बन गई है — जहां रिकॉर्ड 182 उम्मीदवार मैदान में उतरे। यह पद युवा कांग्रेस के भीतर भविष्य की बड़ी राजनीति का प्रवेश द्वार माना जाता है। यही वजह है कि महासचिव पद के लिए हुए घमासान ने सभी की निगाहें खींची हैं। प्रदेश कार्यकारिणी में कुल 48 महासचिव बनाए जाएंगे, जिनमें वर्गीय संतुलन को प्राथमिकता दी गई है — 17 अनारक्षित, 3 ST, 3 SC, 5 OBC, 5 अल्पसंख्यक, 11 महिलाएं, 2 OBC महिलाएं, 1 अल्पसंख्यक महिला, 1 दिव्यांग और 1 ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि शामिल होंगे।