नागपुर में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान: “चार बच्चे पैदा करो, एक RSS को दो”, बोले : संघ कार्यकर्ता संकट में बचाते हैं जान

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नागपुर में आयोजित एक धार्मिक एवं वैचारिक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने एक बार फिर जनसंख्या, समाज और संगठन की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है। शुक्रवार को विश्व के पहले बताए जा रहे ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में उन्होंने परिवार, समाज और राष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत सहित कई संत और राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद रहीं।

“चार बच्चों में से एक संघ को दें”

अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से कहा कि वे चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित करें, ताकि वह समाज और जरूरतमंदों की सेवा में योगदान दे सके। उन्होंने संघ के कार्यकर्ताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आपदा आती है तो आम लोग अपनी सुरक्षा में लग जाते हैं, जबकि संघ से जुड़े स्वयंसेवक जोखिम उठाकर दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।

‘भारतदुर्गा मंदिर’ को बताया प्रतीकात्मक पहल

नागपुर के कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में बनने जा रहे ‘भारतदुर्गा मंदिर’ को लेकर शास्त्री ने कहा कि यह केवल धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि यह भारतीय परंपरा के उस संतुलन का प्रतीक बनेगा, जिसमें ‘शास्त्र’ और ‘शस्त्र’ दोनों का महत्व है। उन्होंने ‘माला और भाला’ के संगम की बात करते हुए कहा कि हमारे देवी-देवताओं के हाथों में भी अस्त्र-शस्त्र होते हैं और यदि केवल शांतिपूर्ण प्रतीकों से ही काम चलता, तो महाभारत जैसा युद्ध नहीं होता।

नारी सम्मान को लेकर कही यह बात

अपने भाषण में उन्होंने भारत में महिलाओं की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है, जहां नारी को ‘पूज्या’ के रूप में देखा जाता है। उन्होंने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि क्या कहीं ‘पाकिस्तान माता’ या ‘चीन माता’ जैसे संबोधन सुनने को मिलते हैं। उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है।

‘अखंड भारत’ की कामना

भूमि पूजन के क्षणों को भावुक बताते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह समय देश के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत जैसा है। उन्होंने कहा कि उनकी कामना है कि भारत संतों और आध्यात्मिक मूल्यों से समृद्ध बना रहे और भविष्य में ‘अखंड भारत’ की दिशा में आगे बढ़े।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

इस आयोजन में स्वामी अवधेशानंद गिरि, कार्ष्णीपीठाधीश्वर गोविंद गिरी, दीदी मां ऋतम्भरा और चिन्मया मिशन के संतों के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए। कार्यक्रम धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेशों का संगम रहा।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे बयान

धीरेंद्र शास्त्री से पहले कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने भी इसी तरह का बयान दिया था। मई 2024 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिव महापुराण कथा के दौरान उन्होंने कहा था कि सनातनियों को चार बच्चे पैदा करने चाहिए—दो अपने लिए और दो राष्ट्र के लिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक इस संबंध में कोई कानून नहीं बनता, तब तक अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए। इसी दौरान उन्होंने बेटियों को लेकर भी अपनी राय व्यक्त की थी।

बयान से तेज हुई बहस

नागपुर में दिए गए धीरेंद्र शास्त्री के ताजा बयान ने एक बार फिर जनसंख्या, धार्मिक पहचान और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है। जहां समर्थक इसे समाज सेवा और सांस्कृतिक चेतना से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आलोचक इस तरह के बयानों को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।