शिवसेना (यूबीटी) में असंतोष की अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों के बाद अब अपने विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक 22 जून को शाम 4 बजे मुंबई स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में होगी। मुख्य सचेतक सुनील प्रभु और एमएलसी अनिल परब ने पत्र जारी कर विधानसभा और विधान परिषद के सभी सदस्यों को बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। बैठक में उद्धव ठाकरे स्वयं मौजूद रहेंगे और विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे।
इससे पहले रविवार को उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों की बैठक भी बुलाई थी। बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजभाऊ वाजे और संजय पाटिल शामिल हुए, जबकि कुछ सांसद ऑनलाइन जुड़े। संजय राउत ने बताया था कि सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपना भरोसा जताया। वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) के पास 9 सांसद और 19 विधायक हैं।
इसी बीच शिवसेना नेता कृपाल तुमाने के एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत यूबीटी के 7 सांसद और 16 विधायक उनके संपर्क में हैं। उनके अनुसार बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। तुमाने ने कहा कि यह प्रक्रिया पिछले एक महीने से चल रही है और अब फैसला होने के करीब है।
वहीं शिवसेना नेता संजय निरुपम ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार कमजोर हो रही है और उनके नेतृत्व पर कई नेताओं का भरोसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधि लगातार साथ छोड़ रहे हैं और आने वाले समय में यह सिलसिला और तेज हो सकता है। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि यूबीटी के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा और संबंधित नेता अपने राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लेंगे।
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में भरोसा जताया था और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। राउत ने आरोप लगाया कि भाजपा का काम विपक्षी दलों को तोड़ना है और पहले भी शिवसेना तथा एनसीपी को निशाना बनाया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी के सभी 9 सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में भी दल-बदल की राजनीति पर सवाल उठाए हैं। संपादकीय में कहा गया कि निजी स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति लोकतंत्र और मतदाताओं के विश्वास को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में 22 जून को होने वाली विधायकों की बैठक को शिवसेना (यूबीटी) के लिए अहम माना जा रहा है, जिस पर महाराष्ट्र की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।