ड्रग्स के खिलाफ केंद्र का बड़ा अभियान: अमित शाह ने पेश किया 2026-29 का विजन प्लान, 6 हजार करोड़ की जब्त खेप नष्ट

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देश में नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक नई रणनीति के साथ बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ जारी किया। इस दस्तावेज में आने वाले वर्षों के लिए ड्रग्स के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान की दिशा तय की गई है।

बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य जांच एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने और नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई केवल नियमित अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे खुफिया जानकारी आधारित और नेटवर्क-केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि तस्करों के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए सभी एजेंसियों को समन्वित और परिणाम आधारित कार्रवाई करनी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट का गंभीरता से अध्ययन किया जाए और अगले एक वर्ष में सभी प्रमुख संकेतकों में सुधार दिखाई देना चाहिए। सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उसके सकारात्मक परिणाम भी सुनिश्चित करना है ताकि देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जा सके।

‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ में ड्रग्स की मांग को कम करने, तस्करी की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इस दस्तावेज को भविष्य की राष्ट्रीय नीति का आधार माना जा रहा है, जिसके जरिए सभी एजेंसियां एक साझा रणनीति पर काम करेंगी।

सरकार ने नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी पर विशेष फोकस किया है। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर संचालित हो रहे इन नेटवर्कों को खत्म करने के लिए डिजिटल निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

इसके अलावा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान, बेहतर उपचार सुविधाएं और प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि केवल तस्करों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी उतना ही आवश्यक है।

बैठक के दौरान गृह मंत्री ने ‘ऑनलाइन ड्रग डिस्पोजल फोर्टनाइट कैंपेन’ की शुरुआत भी की। इस अभियान के तहत देशभर में जब्त किए गए लगभग 2.09 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नष्ट किया गया। इन प्रतिबंधित पदार्थों की अनुमानित बाजार कीमत करीब छह हजार करोड़ रुपये बताई गई है।

केंद्र सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अभियान और अधिक तेज किया जाएगा। नई नीति, आधुनिक तकनीक, एजेंसियों के बेहतर समन्वय और सख्त कानूनों के जरिए नशे के नेटवर्क को कमजोर कर भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी रहेंगे।